बारिश में झोपड़ी और सामुदायिक भवन में पड़ने में मजबूर है बच्चे,स्कूल भवन हो चुकी जर्जर।

[email protected]कांकेर. कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक में शिक्षा की स्थिति बहुत ही खराब होती दिख रही है। कहीं पर शिक्षक नहीं तो, कहीं भवन के अभाव के चलते शिक्षा व्यवस्था चरमारा गई है। ग्राम पंचायत छोटे बेटियां के आश्रित ग्राम मेहडा में प्राथमिक शाला की 5 कक्षाओं के 50 बच्चे पानी गिरते ही गांव के बने गोटूल की झोपड़ी में पढऩे चले जाते हैं।

वही ग्राम पंचायत कोयगांव के प्राथमिक स्कूल के पांच क्लास के 31 बच्चे सामुदायिक भवन में बैठकर पढ़ाई करने पर विवश है ।

हालत ये है कि ये दोनो ही स्कूल में कभीभी हो सकता है बड़ा हादसा

स्कूल भवन काफी जर्जर स्थिति में है। छत पूरी तरह से टूटा हुआ है। लोहे के छड़ बाहर दिख रहे हैं। बरसात में स्कूल भवन का कोई भी कमरा बैठने योग्य नहीं है। ये दोनो स्कूल के कमरों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। बरसात में किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ग्राम मेहडा के पटेल सहदेव उसेंडी ने बताया बारिश होते ही कमरे में पानी भर जाती है और भवन भी गिरने की स्थिति में है इसकी सूचना दो साल से बीईओ कार्यलय को दी है। बावजूद प्रशासन जर्जर स्कूल भवन को लेकर गंभीर नहीं है। स्कूल प्रशासन को शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार है।

जान जोखिम डालकर बच्चे पढ़ने पर मजबूर

इन तमाम अव्यवस्था के बीच स्कूल में छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। शासन का किसी प्रकार का सार्थक सहयोग नहीं दिख रहा है। कोयलीबेड़ा ब्लॉक में शिक्षकों की कमी से भी विद्यालय जूझ रहा है। तमाम असुविधाओं के बीच अंचल के छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढऩे को मजबूर हैं।

कोयगांव प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका किरणबाली गोटे ने बताई कि स्कूल जर्जर स्तिथि में है इसलिए चार महीने से इसी सामुदायिक भवन में ही बैठाकर पढ़ाई करवा रहे हैं।खिड़की दीवाल सभी टूटने की कगार में है।

पखांजूर से बिप्लब कुण्डू

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