बांस व बल्ली के अस्थाई पुलिया से गुजर रही है ग्रामीण,अंजारी नदी पर आज तक नही बना पुल–

[email protected]पखांजूर.मध्यप्रदेश के जमाने मे बस्तर एक जिला हुआ करता था।जिसका क्षेत्रफल केरल राज्य से बड़ा था।इसके लिए केबल मात्र एक ही कलेक्टर ने पूरे बस्तर के कमान संभाल कर रखा था।समय के साथ-साथ बस्तर 3 जिलों में बंटा और उसके बाद अब 7 जिले हो गए,इसके बाद भी आज जो दिखने को मिलता है उससे लगता है कि विकास आज भी गांव के अंतिम छोड़ तक नही पहुच पाया है।अंतिम छोड़ के लोगबाग आज भी वैसा ही जीवन जी रहे है,जैसे 1947 के पहले जी रहे थे।
हम बात कर रहे है कोयलीबेड़ा विकासखंड के तहसील पखांजूर के जहा छोटेबेठिया से मांझीकुटनी से पीव्ही 95 जाने वाली नदी का पुल निर्माण के संबंध में जो कि आज तक नहीं हुआ है आज आज़ादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी लोग आज से 50 बर्ष पीछे का जीवन जीने को मज़बूर है जहां बरसात आते ही पुरा क्षेत्र किसी आदि काल के बस्ती जैसा माहौल बन जाता है लगभग 17-18 गांव के लोग बारिश के मौसम मे अपनी अपनी जरूरतों के सामान को अपने हैसियत के हिसाब से भंडार कर रखते है और बारिस के मौसम के ख़त्म का इंतज़ार करते हैं ताकि वे फिर से बाजार जा सके क्यु की बरसात के मौसम मे अंजारी नदी उफान पे रहने के कारण वे नदी पर बने अपने पारम्परिक पुल ( लकड़ी और बास से बना ) से भरी बस्तुए जैसे धान बीज, रासायनिक खाद, बिल्डिंग मेटेरियल और भी तमाम भरी बस्तुए नहीं ला सकते है और ऐसे सक्षम इस क्षेत्र मे 25 प्रतिशत ही है और बाकि 75 प्रतिशत इन 25% पे निर्भर है जो की इनके निर्भरता का फ़ायदा उठाकर इनका शोषण करते है आपको जानकर हैरानी होंगी की आज के इस आत्मनिर्भर भारतीय युग मे भी कोई क्षेत्र भी है जो साल के 4-5 माह हाट बाजार से पूरी तरह काट चूका होता है छोटे बैठिया से कळरकुटनी से संगम मार्ग मे प्रधामंत्री सडक योजना से सडक निर्माण कार्य तो लगभग पुरा हो चूका है परन्तु माझीकूटनी के बिच एक ब्रिज़ का काम अधूरा है जिससे वहा रास्ता पूरी तरह बाधित है नदी बड़े और गहरे होने के कारण नदी पार करने के लिए ग्रामीण सालो से माझीकूटनी से 95 मार्ग मे पारम्परिक तरीके से नदी किनारे लगे मोटे मोटे बृक्ष मे बड़े बड़े लकड़ी को आपस मे बांधकर एक पुलिया का निर्माण कर लेते है और इसको पार कर अपनी जरुरत पुरा करने नजदीकी साप्ताहिक बाजार जाते है ठीक ऐसा ही स्तिथि अंजरी गांव की है जो की अंजरी नदी के पास बसा है जहां स्थानीय लोगो द्वारा बांस,बल्ली से प्रति बर्ष पुलिया बनाते है और अपनी जरूरतों को पुरा करने इस पुलिया से होकर पखांजूर मुख्यालय पहुचते है।
पीव्ही 33,40 से डोटोमेटा से घोड़ागांव से घोड़ागांव टोला पीव्ही123,44 होते हुए बांस,बल्ली का पुल पार करके अंजरी गांव होते हुए अंजरी टोला फिर मछपाल्ली होते मछपाल्ली के 4-5 टोला हुए पीव्ही 44 खेत पारा से पीव्ही 62 से 94,95 से जाम कूटनी से दाई हाथ की और छोटे बेठिया रोड जाने के लिए माझी कूटनी से अंजरी नदी पे लकड़ी के पुल पार करके कळरकुटनी पार करके छोटे बैठिया बीएसएफ कैंप के सामने मुख्य मार्ग पे आते है,और जाम कूटनी से बाई हाथ की ओर नदी पार करके संगम रोड जाते है तो पीव्ही 65,66, संगम मुख्य सडक पे आते है।एक पुलिया नही होने से लोगो को कितने परेशानिया का सामना करना पर रहा है।फिर भी शासन प्रशासन को इस और ध्यान नही।

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