गोंड राजा शंकर शाह व उनके बेटे कुंवर रघुनाथ का मनाया गया बलिदान दिवस—

[email protected]पखांजूर.आदिवासी छात्र युवा संगठन (ASYU) पखांजुर द्वारा अमर शहीद गोंड राजा शंकर शाह एवं उनके पुत्र अमर शहीद कुंवर रघुनाथ शाह के छाया चित्र पर पुष्प अर्पित कर बलिदान दिवस प्री.मेट्रिक बालक छात्रावास पखांजुर और छोटेबेटिया में मनाया गया। आदिवासी छात्र युवा संगठन (ASYU) के प्रमुख अध्यक्ष राजेश नुरूटी के निर्देश अनुसार संगठन के सर्कल व ब्लाक इकाई स्तर पर शहादत दिवस मनाया गया।

संगठन महामंत्री विनोद कुमेटी और संगठन प्रभारी निखलेश नाग और सर्कल छोटेबेटिया अध्यक्ष सोमा नुरूटी ने कहा कि
1857 में जबलपुर में तैनात अंग्रेजों की 52वीं रेजीमेंट का कमांडर क्लार्क बहुत ही क्रूर था. वह इलाके के छोटे राजाओं, जमीदारों को परेशान किया करता था और मनमाना कर वसूलता था. इस पर तत्कालीन गोंडवाना राज्य, जो कि मौजूदा जबलपुर और मंडला का इलाका था, वहां के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेज कमांडर क्लार्क के सामने झुकने से इंकार कर दिया. दोनों ने आसपास के राजाओं को अंग्रेजों के खिलाफ इकट्ठा करना शुरू किया।
शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह अपनी सेना के साथ अंग्रेजों का विरोध करना शुरु कर दिया, लेकिन दोनों के पास इतनी सेना नहीं थी की वे अंग्रेजों से लड़ सकते. इसलिए शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों से लड़ने के लिए सामाजिक आंदोलन चलाया और लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा करने के लिए मुहिम शुरू की. इस बात की भनक जब अंग्रेजों को लगी, तो अंग्रेज डर गए, उन दिनों गोंड राजाओं का साम्राज्य जबलपुर से शुरू होकर पूरे महाकौशल तक फैला था. यदि ये सभी लोग विरोध करते तो अंग्रेजों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती थी।

पिता पुत्र से डरे अंग्रेजों ने उनकी आवाज दबाने के लिए शंकर शाह और रघुनाथ शाह को मारने का षड्यंत्र रचा और इनके पाले हुए एक स्थानीय राजा ने अंग्रेजों को शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बारे में जानकारी दे दी. अंग्रेजों ने चालाकी से इन गोंड राजाओं को गिरफ्तार कर लिया और भरे बाजार जबलपुर कमिश्नरी के सामने 18 सितंबर 1857 को पिता और पुत्र को तोप के आगे बांधकर उड़ा दिया. शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने अपनी शहादत दे दी, लेकिन अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके।

इस अवसर पर विनोद कुमेटी महामंत्री , निखलेश नाग संगठन प्रभारी, छात्रावास अधीक्षक अनिल कोड़ोपी , सोनु पोटाई, उमेश्वार देहारी रंजन नुरुटी सोमक्रित टान्डिया, सुखराम पोटाई प्रकाश पोटाई, राजेश नरेटी अर्जुन कुमेटी,अनिल वड्डे आदि उपस्थिति थे।

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